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परियोजनाएँ

भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय (एनएमआईसी)

  • केन्द्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रयोगशाला द्वारा भारत में अपने ढंग का प्रथम संग्रहालय भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय फिल्म प्रभाग और नेहरू विज्ञान केन्द्र, मुम्बई के साथ विकसित किया गया ।  यह कहानी कहने वाला एक संग्रहालय है जहाँ कहानी को संपुष्ट करने के लिए कलाकृतियों का उपयोग किया गया है ।  यह पहला संग्रहालय है जो भारतीय फिल्मों को समर्पित है ।  य‍ह सिनेमा के कर्तनों, चित्रों, फिल्म उपकरणों और अन्य स्मरणीय फिल्म वस्तुओं के माध्यम से पूरे भारत के सिनेमा का इतिहास दर्शकों को दिखाता है ।  लेकिन स्वाधीनता से पहले एवं उसके बाद गुलशन महल की कहानी बड़ी दिलचस्प है ।  लगभग 70-80 वर्ष पुराने, अनेक पुराने उपकरण जो भारत के प्रारंभिक वृत्तचित्रों को बनाने के काम आते थे, उन परिधानों के साथ दर्शाये गये हैं जिन्हें आइकॉनिक बालीवूड दृश्यों में उस समय के सितारे पहना करते थे । 
    8 दीर्घाओं के माध्यम से गुलशन महल में उन्नीसवीं शताब्दी के विरासत बंगला तथा भारतीय सिनेमा के इतिहास का क्रमवार विवरण बताया जाता है ।  लेकिन इस संग्रहालय के साथ केन्द्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रयोगशाला और राविसंप का नाम जुड़ा है, अतः यह  एक अन्त: क्रियात्मक संग्रहालय भी है ।  श्रव्य(आडियो) मार्ग दर्शनों (गाइडों) के अतिरिक्त यह भारत में बने प्राचीनतम सिनेमाओं का पुनर्प्राप्ति भी प्रस्तुत करता है ।  यहाँ फिल्मीं गीतों के हजारों गानों की अन्त:क्रियात्मक खोज, प्रायोगिक फिल्म शूटिंग और फिल्म बनने के उपरांत के क्षेत्रों को देखा जा सकता है जहाँ बच्चे अपनी फिल्मी प्रतिभा का पूर्व परीक्षण कर सकते हैं ।  इसमें गांधी एवं भारतीय सिनेमा पर अस्थायी प्रदर्शनी भी शामिल है ।
    भारत में प्रथम अनुप्राणन फिल्म को प्रदर्शित करने के अतिरिक्त यह दीर्घाकार अनुप्राणन कैमरा भी प्रदर्शित करता है जिससे फिल्‍म बनना संभव हुआ । यह सत्यजीत राय, मृणाल सेन और वी शांताराम जैसे महान दिग्गज हस्तियों द्वारा व्यवहृत कैमरों और सम्पादन करने वाली मशीनों को भी दर्शाता है ।  यह संग्रहालय मैटिनी आइडल्स एवं रजत पर्दा दिवस का दृश्यात्मक वर्णन प्रस्तुत करता है ।  बावजूद इसके, यह नयी धारा, फिल्म प्रमाणन, क्षेत्रीय सिनेमाओं और फिल्म निर्माण की प्रविधियों के बारे में भी बताता है ।